आज तारीख़ १२ मई २२ लक्ष्मण मामाजी के लड़के के लड़के हेमंत की शादी में आए हैं मैं जय और जय की मम्मी काका साहब काकी साहब, उनकी तीनों बालिका और हर्ष हम सब कार से आए हैं।
हम बाडकुममैद से सुबह सुबह 10:00 बजे निकले हैं और यहां से खाचरोद पहुंचे वहां पर सभी ने मिलकर आम का जूस पिया। और इसके बाद हम सीधे पहुंच गए रिंगन्या।
लक्ष्मण मामा ने अकेले सारी व्यवस्था सम्भाली है लेकिन फिर भी कुछ चीजों पर ध्यान देने की जरूरत है जैसे पंगत जहां खाना खा रहे थे वाला लाइट की प्रॉपर व्यवस्था नहीं थी। खाना भी इतना स्वादिष्ट नहीं बना था खाना भी थोड़ा स्वादिष्ट हो सकता था वहा उसके बाद पानी पीने के कोई ग्लास की व्यवस्था नहीं थी। सारी जनता जब खाना खा लेते हैं और पानी पीने की बारी आती है तो ग्लास ही नहीं थे बाल्टी से पानी पी रहे थे।
शाम को खाने का प्रोग्राम रखा और फिर अगले दिन दोपहर में जुलूस रखा ।







